खाटू का बनू पंछी लिरिक्स | तेरे दर पे बसेरा हो | खाटू श्याम भजन
खाटू का बनू पंछी लिरिक्स
खाटू का बनू पंछी – श्री श्याम के चरणों में सदा रहने की भक्त की प्रार्थना
“खाटू का बनू पंछी” एक अत्यंत भावपूर्ण खाटू श्याम भजन है, जिसमें भक्त अपनी सबसे बड़ी इच्छा व्यक्त करता है—वह खाटू धाम का एक छोटा-सा पंछी बन जाए ताकि उसका जीवन श्री श्याम बाबा के चरणों में ही बीते। भजन में संसार की इच्छाओं से अधिक प्रभु के दर्शन, उनकी चौखट और उनकी भक्ति को महत्व दिया गया है।
इस भजन की मुख्य पंक्ति “तेरे दर पे बसेरा हो, नित दिन दीदार करूं” भक्त के उस प्रेम को दर्शाती है जिसमें वह किसी बड़े वरदान की कामना नहीं करता, बल्कि केवल इतना चाहता है कि हर सुबह और हर शाम उसे अपने आराध्य के दर्शन होते रहें। यही भाव इस रचना को श्याम प्रेमियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाता है।
इस सुंदर भजन को अनुराग मित्तल जी ने अपनी मधुर आवाज़ में प्रस्तुत किया है तथा इसके भावपूर्ण बोल राहुल मिश्रा जी द्वारा लिखे गए हैं। यह भजन विशेष रूप से खाटू श्याम संकीर्तन, फाल्गुन मेले, भजन संध्या और सत्संगों में श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
खाटू का बनू पंछी लिरिक्स (Lyrics)
खाटू का बनू पंछी,
तेरे दर पे बसेरा हो,
नित दिन दीदार करूं,
जब शाम सवेरा हो।।
तर्ज – बचपन की मोहब्बत को।
मैं उड़ता फिरूं देखूं,
प्रेमी की कतारों को,
मेरे श्याम,,
मैं भी श्याम लगाऊंगा,
तेरे जयकारों को,
फिर लौट के घर जाऊं,
जब श्याम अंधेरा हो,
नित दिन दीदार करूं,
जब शाम सवेरा हो।।
ज्यादा ना चाहूं मैं,
बस इतना कर देना,
मेरे श्याम,,
दुनिया को तो दर देते,
मुझे दर पे ही घर देना,
कब्जा उस पे बाबा,
तेरा और मेरा हो,
नित दिन दीदार करूं,
जब शाम सवेरा हो।।
नैनों की खिड़की से,
नित रोज निहारू मैं,
मेरे श्याम,,
चौखट से निकल नित दिन,
तकदीर सवारूं मैं,
भजनों की बूंदों से,
प्रभु मेरा गुजारा हो,
नित दिन दीदार करूं,
जब शाम सवेरा हो।।
तू कैद मुझे कर ले,
प्रभु प्रेम पिटारे में,
मेरे श्याम,,
मुझे उम्र कैद देना,
तेरे चौबारे में,
आजाद ना हो राहुल,
ऐसा वक्त सुनहरा हो,
नित दिन दीदार करूं,
जब शाम सवेरा हो।।
खाटू का बनू पंछी,
तेरे दर पे बसेरा हो,
नित दिन दीदार करूं,
जब शाम सवेरा हो।।
Singer – Anurag Mittal
Lyrics – Rahul Mishra
भजन का भावार्थ
इस भजन में भक्त श्री खाटू श्याम बाबा से संसार की कोई बड़ी इच्छा नहीं मांगता। उसकी केवल एक कामना है कि उसका जीवन सदैव बाबा की चौखट पर बीते। यदि संभव हो तो वह खाटू धाम का एक पंछी बन जाए, ताकि प्रतिदिन प्रभु के दर्शन कर सके और भक्तों के साथ “जय श्री श्याम” का गुणगान करता रहे।
“मुझे दर पे ही घर देना” पंक्ति इस बात का प्रतीक है कि सच्चे भक्त के लिए भगवान की चौखट ही सबसे बड़ा आश्रय और सबसे सुखद स्थान है। भजन यह भी सिखाता है कि प्रभु का प्रेम ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है।
इस भजन का आध्यात्मिक संदेश
- भगवान के चरणों में रहना सबसे बड़ा सौभाग्य है।
- सच्चा भक्त भौतिक सुखों से अधिक ईश्वर के दर्शन चाहता है।
- प्रभु का नाम और भजन जीवन का वास्तविक आधार हैं।
- ईश्वर की शरण में बिताया गया जीवन ही सफल जीवन है।
- प्रेम, समर्पण और श्रद्धा से भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
यह भजन कब गाया जाता है?
यह भजन विशेष रूप से इन अवसरों पर गाया जाता है—
- खाटू श्याम संकीर्तन
- फाल्गुन मेला
- श्याम बाबा जागरण
- एकादशी भजन संध्या
- सत्संग एवं भक्ति कार्यक्रम
- खाटू धाम यात्रा
- दैनिक पूजा एवं भजन
भजन विवरण
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भजन | खाटू का बनू पंछी |
| मुख्य पंक्ति | तेरे दर पे बसेरा हो |
| आराध्य | श्री खाटू श्याम बाबा |
| गायक | अनुराग मित्तल |
| गीतकार | राहुल मिश्रा |
| तर्ज | बचपन की मोहब्बत को |
| भाषा | हिंदी |
| श्रेणी | खाटू श्याम भजन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
“खाटू का बनू पंछी” किस भगवान को समर्पित भजन है?
यह भजन श्री खाटू श्याम बाबा को समर्पित है।
इस भजन के गायक कौन हैं?
इस भजन को अनुराग मित्तल जी ने अपनी मधुर आवाज़ में प्रस्तुत किया है।
इस भजन के गीतकार कौन हैं?
इस भजन की रचना राहुल मिश्रा जी ने की है।
इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
यह भजन भगवान के चरणों में स्थायी शरण, प्रेम और प्रतिदिन दर्शन की भक्त की गहरी इच्छा को व्यक्त करता है।
यह भजन किन अवसरों पर गाया जाता है?
यह भजन खाटू श्याम संकीर्तन, जागरण, फाल्गुन मेले, सत्संग और दैनिक भक्ति में श्रद्धापूर्वक गाया जाता है।
निष्कर्ष
“खाटू का बनू पंछी” केवल एक भजन नहीं, बल्कि हर श्याम भक्त के हृदय की वह भावना है जिसमें वह अपने जीवन का प्रत्येक क्षण श्री श्याम बाबा की सेवा और दर्शन में बिताने की कामना करता है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चा सुख धन-दौलत में नहीं, बल्कि भगवान के चरणों में है। यदि आप श्याम प्रेमी हैं, तो यह भजन आपके मन में भक्ति, समर्पण और शांति का संचार करेगा।
॥ जय श्री श्याम ॥
