क्षमा प्रार्थी हूँ क्षमा मुझको कर दो लिरिक्स | मुकेश बगड़ा | खाटू श्याम भजन
क्षमा प्रार्थी हूँ क्षमा मुझको कर दो लिरिक्स
क्षमा प्रार्थी हूँ – श्री श्याम बाबा से क्षमा और कृपा की विनम्र प्रार्थना
“क्षमा प्रार्थी हूँ, क्षमा मुझको कर दो” एक अत्यंत भावपूर्ण खाटू श्याम भजन है, जिसमें भक्त अपने आराध्य श्री श्याम बाबा के चरणों में सिर झुकाकर अपनी भूलों और पापों के लिए क्षमा याचना करता है। इस भजन में पश्चाताप, आत्मसमर्पण और भगवान की असीम करुणा पर अटूट विश्वास का सुंदर चित्रण मिलता है।
भजन की मुख्य पंक्ति “तुम हो दयालु, तुम हो कृपालु” हमें यह विश्वास दिलाती है कि भगवान अपने भक्त की सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य सुनते हैं। जब भक्त अपने अपराध स्वीकार कर पूरे मन से क्षमा मांगता है, तब ईश्वर उसे नई शुरुआत का अवसर प्रदान करते हैं।
इस हृदयस्पर्शी भजन को मुकेश बगड़ा जी ने अपनी भावपूर्ण आवाज़ में प्रस्तुत किया है, जबकि इसके मार्मिक बोल सचिन तुलस्यान जी द्वारा लिखे गए हैं। यह भजन विशेष रूप से श्याम संकीर्तन, सत्संग, आत्मचिंतन, प्रार्थना सभाओं और भक्ति आयोजनों में श्रद्धा के साथ गाया जाता है।
क्षमा प्रार्थी हूँ क्षमा मुझको कर दो लिरिक्स (Lyrics)
क्षमा प्रार्थी हूँ,
क्षमा मुझको कर दो,
तुम हो दयालु,
तुम हो कृपालु,
अपना के सर पे,
मेरे हाथ धर दो,
क्षमा प्रार्थी हूं,
क्षमा मुझको कर दो।bd।
तर्ज – वो जब याद आए।
गलतियां सांवरे,
मैंने की है कई,
माफी मांगू अगर,
वो भी काफी नहीं,
दिल तेरा दरिया,
मन मेरा पापी,
अगर हो सके तो,
मेरे पाप हर लो,
क्षमा प्रार्थी हूं,
क्षमा मुझको कर दो।bd।
जितनी मर्जी तेरी,
तू मुझे डांट ले,
ये कहो ना मेरे बिन,
उमर काट ले,
तू ही तो मेरा,
माता पिता है,
बेटा समझ के,
बाहों में भर लो,
क्षमा प्रार्थी हूं,
क्षमा मुझको कर दो।bd।
मेरा वादा है ये,
जाऊंगा मैं सुधर,
चरणों में रहने दे,
मुझको बेघर ना कर,
‘सचिन’ बिन तुम्हारे,
रह ना सकेगा,
सजा मौत की तुम,
भले नाम कर दो,
क्षमा प्रार्थी हूं,
क्षमा मुझको कर दो।bd।
क्षमा प्रार्थी हूँ,
क्षमा मुझको कर दो,
तुम हो दयालु,
तुम हो कृपालु,
अपना के सर पे,
मेरे हाथ धर दो,
क्षमा प्रार्थी हूं,
क्षमा मुझको कर दो।bd।
Singer – Mukesh Bagda
Lyrics – Sachin Tulsyan
भजन का भावार्थ
इस भजन में भक्त विनम्रता के साथ स्वीकार करता है कि उससे जीवन में अनेक गलतियाँ हुई हैं। वह श्री श्याम बाबा से प्रार्थना करता है कि वे अपनी असीम दया और करुणा से उसके सभी अपराधों को क्षमा कर दें। भक्त यह भी स्वीकार करता है कि भगवान उसके लिए माता-पिता के समान हैं, इसलिए वह उनकी शरण छोड़कर कहीं और नहीं जाना चाहता।
भजन यह संदेश देता है कि सच्चे पश्चाताप और ईमानदार आत्मसमर्पण से ईश्वर की कृपा प्राप्त की जा सकती है। जब मनुष्य अपनी भूलों को स्वीकार कर सुधार का संकल्प लेता है, तब भगवान उसे नई दिशा और नया जीवन प्रदान करते हैं।
इस भजन का आध्यात्मिक संदेश
- अपनी गलतियों को स्वीकार करना आध्यात्मिक विकास का पहला कदम है।
- भगवान दयालु और कृपालु हैं, वे सच्चे मन से की गई क्षमा याचना स्वीकार करते हैं।
- ईश्वर की शरण में आने वाला व्यक्ति कभी अकेला नहीं रहता।
- पश्चाताप के साथ सुधार का संकल्प भी आवश्यक है।
- भगवान का प्रेम माता-पिता के प्रेम की तरह निस्वार्थ और करुणामय होता है।
यह भजन कब गाया जाता है?
यह भजन विशेष रूप से इन अवसरों पर गाया जाता है—
- खाटू श्याम संकीर्तन
- श्याम बाबा जागरण
- सत्संग एवं भजन संध्या
- प्रार्थना सभाएँ
- आत्मचिंतन एवं ध्यान
- दैनिक पूजा एवं भक्ति
भजन विवरण
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भजन | क्षमा प्रार्थी हूँ क्षमा मुझको कर दो |
| मुख्य पंक्ति | तुम हो दयालु, तुम हो कृपालु |
| आराध्य | श्री खाटू श्याम बाबा |
| गायक | मुकेश बगड़ा |
| गीतकार | सचिन तुलस्यान |
| तर्ज | वो जब याद आए |
| भाषा | हिंदी |
| श्रेणी | खाटू श्याम भजन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
“क्षमा प्रार्थी हूँ क्षमा मुझको कर दो” किस भगवान को समर्पित भजन है?
यह भजन श्री खाटू श्याम बाबा को समर्पित है।
इस भजन के गायक कौन हैं?
इस भजन को मुकेश बगड़ा जी ने अपनी भावपूर्ण आवाज़ में प्रस्तुत किया है।
इस भजन के गीतकार कौन हैं?
इस भजन की रचना सचिन तुलस्यान जी ने की है।
इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
यह भजन भगवान से क्षमा, कृपा, आत्मसमर्पण और जीवन में सुधार का संकल्प लेने का संदेश देता है।
यह भजन किन अवसरों पर गाया जाता है?
यह भजन श्याम संकीर्तन, सत्संग, प्रार्थना सभा, आत्मचिंतन और दैनिक भक्ति के दौरान श्रद्धापूर्वक गाया जाता है।
निष्कर्ष
“क्षमा प्रार्थी हूँ, क्षमा मुझको कर दो” एक ऐसा भजन है जो हर भक्त को अपनी भूलों को स्वीकार कर भगवान की शरण में आने की प्रेरणा देता है। यह हमें सिखाता है कि ईश्वर की करुणा असीम है और सच्चे मन से की गई क्षमा याचना कभी व्यर्थ नहीं जाती। यदि हृदय में पश्चाताप, विश्वास और समर्पण हो, तो श्री श्याम बाबा अपने भक्त पर अवश्य कृपा करते हैं।
॥ जय श्री श्याम ॥
